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ASTROLOGY OF MAHAVASTU

  • Writer: Chida nanda
    Chida nanda
  • Feb 25, 2018
  • 13 min read

MAHAVASTU IN NUTSHELL;-

1-मैं योग और सांख्य की पृष्ठभूमि से हूं और मानता हूं कि पूर्वजन्म होता है। योग कहता है। महर्षि पतंजलि कहते हैं। शास्त्र कहता है। ऐसा दर्शनशास्त्र भी कहता है। जब तक उस इच्छा को पूरा नहीं कर लेते, जन्म जन्मांतर तक आप जन्म लेते रहेंगे। सभी धर्मों में यह एक सामान्य अवधारणा है। इसका अर्थ यह है कि जो कार्य हमें सौंपा गया है, उसे जब तक पूरा कर नहीं लिया जाता, हमारा पुनर्जन्म होता रहेगा।

2-इसके सिवाय इसका और कोई हल नहीं है।कौन हूं मैं? मैं उस परमतत्व की इच्छा को धारण किए हुए, उसे व्यक्त करने के लिए यात्रा पर निकला हुआ हूं। मुझे एक कर्तव्य, एक कृत्य, एक ड्यूटी मिली हुई है, और मुझे वह व्यक्त करना है। ये हूं मैं। उसने जो काम दिया है, जब उसे करने के लिए निकल पड़ेंगे तो संसार के जितने भी साधन हैं, वह आपकी सेवा में जुट जाएंगे और अगर वे नहीं जुट रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप गलत दिशा में हैं।

3-इसका मतलब सिर्फ इतना ही है।जो व्यक्ति इच्छा पैदा करने वाली आत्मा की अभिव्यक्ति को जान लेता है, वह आत्म-वास्तविकता के मार्ग से आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त कर लेता है। उसे वह रास्ता भी मिल जाता है और वो उसे साकार भी कर लेता है। नहीं तो वो हर जन्म इज्जत का टोकरा सर पर उठा के घूमता रहता है और बार-बार जन्म लेता रहता है। पीड़ा को भोगता है। तुम्हें उसी क्षण पीड़ाओं से मुक्ति मिल जाती है, जब तुम्हें इतना सा अहसास हो जाए कि मैं एक परमतत्व की इच्छा को ले कर यहां आया हूं और मुझे इसे व्यक्त करना है।

इसे अभिव्यक्त करना है।

4-पतंजलि कह रहे हैं, यह इच्छाएं सदा से हैं। होने की इच्छा, अस्तित्व की इच्छा, शाश्वत इच्छाएं हैं। यह मूल प्रवृत्ति है। आप इच्छाओं से मुक्त नहीं हो सकते। जन्म हुआ है तो मरने तक इच्छाएं बनी रहेंगी, क्योंकि इच्छा ही हैं, जो जीवन को चलाती हैं।

5-ज्योतिष का मतलब इनसाइट्स। ईश यानी डिवाइन। ज्योतिष का अर्थ ही है, डिवाइन इनसाइट्स। दैवीय प्रज्ञा। वह दैवीय स्फूर्त विचार, जो ऊर्जा से भर दे। जो स्पष्टता दे। दे स्पष्टता दे। वह विधा जो मुझे एक ऐसा विचार दे, जो मेरे जीवन को समृद्ध कर दे। जो मुझे यथार्थ का अहसास कराए। यह है ज्योतिष।ज्योतिष सवाल प्रस्तुत करने की कला है तभी आप अपने सवालों का जवाब पा सकते हैं। अगर सवाल नहीं है, तो जवाब भी नहीं हैं। अगर सवाल है तो जवाब भी है। ज्योतिष जवाबों का विज्ञान है, जो आपके ग्रह, नक्षत्रों के आधार पर सटीक समाधान करता है।

6-पांच अंग हैं ज्योतिष के। लेकिन मूल रूप से तीन ही हैं- ग्रह, लक्षण और घर।ज्योतिष पांच कॉन्टेक्स्टस में सोचने का ढंग है। ज्योतिष अपनी इंटेंशन अपनी धारणाओं को करेक्ट करने का विषय है। ज्योतिष में धारणा केतु बताता है। सबसे महत्वपूर्ण प्लानेट कौन सा है? धारणा कैसी है? अटेंशन वैसी ही होगी तुम्हारी। उसे राहू कहते हैं। जैसी धारणा है तुम्हारा ध्यान वहीं जाएगा। योगी राहू और केतु, इन दो को पकड़ लेता है। फिर वो पूरे चार्ट के साथ खेलता है। यहां से योग रहस्यों की शुरूआत होती है। इसलिए केतु को मिस्टिक प्लानेट कहा जाता है।

7-कल मुझसे कोई पूछ रहा था, खुद के चार्ट को बायपास कैसे किया जा सकता है। यह सिखाऊंगा आप लोगों को। आप लोग मेरा एस्ट्रो चार्ट देख लेना। बहुत सी चीजें मिलान नहीं करती हैं मेरे चार्ट में। इसका अर्थ ये है कि ज्योतिष गलत हो गया? नहीं, बिल्कुल नहीं। इसका अर्थ यह है कि उसे बायपास कर दिया।ज्योतिष के जितने भी वास्तविक ग्रंथ हैं, उनमें पहली हिदायत यही होती है कि किसी योगी का चार्ट मत देखना। क्यों मत देखना? क्योंकि योगी ग्रहों के प्रभाव से आगे निकल चुका है। चार्ट से आगे निकल चुका है। क्योंकि वह प्रभाव बदल देता है।

8-जो असल में योगी है, वह धारण कर लेता है। धारण कैसे करेगा- धारणा से। जैसे-जैसे उसकी धारणा गहन होती चली जाती है, वह वहीं प्रभाव ले आता है।तुम लोग मशीन के जैसे डिफॉल्ट चल रहे हो। जो ऊपर से प्रोग्रामिंग किया जा रहा है, वही चल रहा है। उसी को जी रहे हो। क्योंकि तुम्हारी धारणाएं गलत हैं। तुम गलत धारणाओं को जी रहे हो। ज्योतिष इसे सही तरीके से बदलना सिखाता है। ज्योतिष एक अनुशासन मानता है। अगर मानसिक अनुशासन नहीं हो तो यह विधा आ सकती।

9-.महाज्योतिष द्वारा सुझाए गए उपाय, उपचार या समाधान जो तुमने अपनी सोच, विचार,व्यवहार, शिक्षा,और पर्यावरण के कारण अपने चरित्र और व्यक्तित्व में परिवर्तन किए हैं। इन परिवर्तनों को हटा दिया जाना चाहिए और उन बदलावों को हटाने के लिए, जो कोई भी दिशा-निर्देश है वो इन्हीं बदलावों को हटाने के लिए ही है । क्योंकि महाज्योतिष के अनुसार, आप जिस तरह से पैदा हुए हो, वैसे बिल्कुल सही हो ! यह महाज्योतिष का मूल सिद्धांत है। यदि आपका ग्रह उच्च का है, तो यह अच्छा है; यदि नहीं है, तो यह भी अच्छा है । आपका ग्रह नीच का है, तो यह भी अच्छा है। भगवान ने तुम्हें अपने मूल स्थिति में पूरी तरह से फिट भेजा है। यह आप है, जिसने स्वयं को बदल दिया है । और इसलिए, आपकी ज़िन्दगी में पीड़ा है। तुम्हारे उन बदलावों को हटाना ही एक नया बदलाव होगा । जब तुमको भटकन से वापस तुम्हारे सही रूप में लाकर खड़ा कर दिया जाएगा फ़िर तुमसे ज़्यादा शक्तिशाली व्यक्ति इस ब्रह्मांड में कोई नहीं होगा । यह एकमात्र सही पद्धति या उपाय है जो किसी व्यक्ति के जीवन से दर्द ( पीड़ा ) को दूर करने,उसके जीवन में ख़ुशी, तरक्की और समृद्धि लाने के लिए किया जा सकता है। ........................................................ 1-The Remedies or Solutions suggested in the MahaJyotish Course of MahaVastu aims to re-instate you, or to bring you back to your original state or form, as you were born. Because according to MahaJyotish, the way you were born, you were absolutely perfect! This is the basic principle of MahaJyotish.

2-This means that the changes that you have developed in your own self or character & personality due to your Thoughts, Beliefs, Education, Religious Philosophies & Environment --- these changes have to be removed & to remove these changes; whatever instructions or remedies can be provided is being done in MahaJyotish. This is the basic Methodology of MahaJyotish.

3-If you have a planet of high degree, then it is good; if you do not have a planet of high degree, then also it is good! If you have a planet of low degree; then it is good, if you do not have a planet of low degree, then also, it is good! God has sent you completely fit in your original state. It’s You, who has changed your own self. You have changed, and therefore, there is grief & pain in your life.

4-To remove all the changes or modifications in you & bring you back to your original self is the only Change possible! The moment a person is re-instated back to his original true Self or Form, removing all the deviations & distractions that he has undergone; he becomes the most powerful person in this Universe! And this is the only Right Method or Remedy that can be done to remove pain (peeda) from a person’s life & bring Happiness, Growth & Prosperity. महाज्योतिष में उपायों की कार्यपद्धति ये बिल्कुल नहीं है कि अगर आपका मंगल नीच का है तो मैं उसको उच्च का कर दूँ। नीच मंगल का आदमी जो है आखिर वो कौन है ? काम मंगल का ही कर रहा होगा। जो व्यक्ति मंदिर,गुरुद्वारे में जनता को खाने खिलाते समय दिशा निर्देश देता है। वो मंगल का व्यक्ति होता है। पर आपने तो उस व्यक्ति को समाज को संभल लेने वाला थानेदार समझ लिया।

वो व्यक्ति यदि कहीं पर दंगे-फ़साद हो जाए तो बिगड़ी हुई स्थिती को तो बिल्कुल नहीं संभाल सकता है । हाँ शायद से किसी शादी-समारोह में वो केटरिंग का काम बेहतर तरीक़े से कर ले । पर उसका थानेदार होना मुमकिन नहीं है ।

जो वास्तव में थानेदार है और व्यवस्थाओं को देख रहा है। यदि आप उसको कहेंगे कि जाकर लंगर देख लो तो उससे वो नहीं होगा । बस यही है ग्रहों के उच्च और नीच । ........................................................................ In the MahaJyotish Course of MahaVastu, the Methodology of Solutions is not that if the planet, Mars or Mangal in your Birth-chart or Horoscope is low, then I’ll make it high! I am against this type of thinking or idea from its roots. Someone has a low degree of Mangal or Mars in his birth-chart. You made it of higher degree. This is actually not possible, but suppose, for instance, you are able to do that--- Now, the person who has a low degree of Mars, is which type of a person? He is actually a person who is doing the work of the planet, Mars only, such as the work of a leader (action-oriented). For example, in a Gurudwara, the person who instructs the helpers serving food in Langar to distribute the food properly among the people sitting to eat. This leadership quality or attribute in a person is Mangal or Mars. Therefore, the instructor in a Langar of a Gurudwara is Mangal. Now, you became so happy with him that you made him an Inspector or In-charge of the Police Station! Then imagine, what will happen? Will he be able to justify his position & do that work? This is not possible and if, at all you make him somehow, will he be able to handle a mob unrest or curfew situation? Never. Thus, this is not possible. Yes, you can make that person the Banqueting Manager in a good Hotel or Restaurant. Hence, you can just give solutions to improve the position of a planet but cannot drastically change its degree or location in Jyotish Shastra or Astrology. कोर्स में आए पार्टिसिपेंट के एक सवाल के जवाब में, डाॅ. ख़ुशदीप बंसल ने कहा कि सुर्य और शनि क्या है? धूप है शनि, तो छाया, सूर्य है । अब सवाल यह उठता है कि क्या छाया का कोई अस्तिव है? जहां सूर्य का अस्तिव होगा, वहां पर छाया का वजूद नहीं होगा । जो छाया से उपजा है वोे ही शनि है। शनि अन्धेरे को प्रतिनिधित्व करता है। वहीं सूर्य सबसे मज़बूत ग्रह है। पर याद रखें कि जब सु्र्य को ग्रहण लगता है तो फ़िर कोई हल नहीं है । शनि कभी ख़त्म हो जाएगा ऐसा भी नहीं है, पर उस पर सु्र्य का प्रभुत्व हमेशा बना रहेगा । ....................................................... A participant of the MahaJyotish Course questions, “In a TV Serial, we saw that Shani, the son of Surya or Sun says that he will not have any impact of the Sun on him. Is it True?” Dr. Khushdeep Bansal answers that he will explain in detail, “What is Shani & What is Surya?” If the Sun’s rays is Shani, then the Shadow is Surya. Now, we very well know that where Sun exists, there Shadow will not exist. According to the Indian mythological Vedic story, it is believed that Chhaya or Shadow was the wife of Lord Surya or the Sun God, and as she was unable to bear the heat of Surya, created a photocopy of her in the form of Shadow & gave it to Surya. Then she went away from Surya! However, these ancient stories should not be taken lightly because they form the basis of characterisation of these elements today. Therefore, Chhaya is also considered to be Shani, because He is known as Surya-Putra, or the son of Lord Surya, the Sun God.

How Astrological Planets affects the life of an individual? Vastushastri Khushdeep Bansal says, there is no direct effect of planets on the life of an individual. When a child takes birth on this planet, the vastu of the house in which the mother conceives the child, decides the horoscope of that child. But, do the effects of that astrological chart remains if he got shifted to another house? He also explains whenever an event happens as per Astrology, the person will change something is his home as per vastu with the change of Maha Dasha and Antar Dasha. How to change the script of subconscious mind to get the desired results in life? He also explains how astrological effects on the life of an individual can be nullified with the application of Vastu Shastra? Amazing and Worth Sharing.

SP.;-

1-Whenever a person speaks anything, it immediately gets translated in which direction, which element is weak so that there is no Confidence. In which zone, which element isn’t there? Fire is not there in the South-South-East. Whenever he speaks, solution is seen! Whenever a person speaks, you do not listen carefully, the words are spoken by the person himself, the building is speaking itself, the building is speaking the solution itself! You should know how to hear. The man himself is speaking. Then whenever he is speaking, directly you should observe the Direction as well as the Element plus Activity. Children do not study. What do they do? Whenever you speak of studies, then they say, “Mama can we watch cartoons?” Now, depending upon age, what is the age? So, where should your attention go? In the West-South-West, a TV might have been placed. So, when we direct the Mental Orientation of the children towards studies, then they will start seeing the TV. Absolutely Right? “I am feeling insecure in my Relationships;” that means what? In the South-West, the Earth element is weak. “I am feeling Financial Insecurity.” The Fire element in the South-East is weak. Are you able to understand the Difference? What a person is speaking; what any person is speaking, then you should directly observe that Direction, Element, Activity or Symbol & match them 100 percent, then you should resolve this problem, because this is how we solve the problems in MahaVastu.8-Is your house or building distracting or deviating you? Is it diluting your thoughts? Prabhav means the feelings or expressions that have come from outside or some other place. Vastu is that study of Space which helps to connect your feelings or expressions with the building in which you live in a simple way, or connects you with the feelings/expressions coming from outside. You don’t need to be like someone, you should always try to be your own self. This is what Yoga says. Then only, you will be able to reach somewhere in your life! Now, can all these talks or thoughts that I am sharing with you develop from your own self automatically? Can you get connected with someone or somewhere and feel complete in your own self? Is this possible? Yes, it is. You just have to create a place or a space in which a person gets connected with his/her own self. He/she should be able to directly connect with the Divine present in his or her own self or the Soul, and to construct a building where this is possible, is called Vastu Shastra. However, while learning this, you must take a pledge today that you have to learn it so well that you can share this valuable knowledge with others too. When this feeling of imparting knowledge to others becomes stronger in you, then you start learning any subject. Getting a gold medal or scoring good marks has nothing to do with becoming successful or prosperous in life. These are different aspects. And as far as MahaVastu is concerned, it is all about how to get connected with your own self, or how to connect a distracted person with his own self or the soul, which is the home of the Divine!

2-Please pay attention to this, as it an important aspect from the learning point of view. You said that “I am working as a Development Manager in an MNC”. Now, the word, “I” indicates the North-East zone, as per Vastu and since you are talking about your position in the organisation in which you work, then I feel that there is a book or a diary of your company in the North-East zone of your house on which is printed the logo of the company. Also, you must have kept documents related to your higher qualifications in the North of your house. So, when you were speaking, I was able to see all this. This is the magic of Vastu! You should be able to see a film that says all about the person and the space in which he lives, when he/she just speaks or talks to you. This is the depth of the knowledge of Vastu, but one has practise it to learn this amazing Science of Space.LikeShow more reactions

माँ बच्चों की नज़र उतारने के लिए लाल मिर्च का प्रयोग करती है और उस मिर्च को जला देती है । इसका क्या अर्थ होता है? बच्चे का तन अगर बुख़ार से तप रहा हो, आंखे सूज गई है तो मंगल है । इस पर माँ क्या करती है? मिर्च के ज़रिए मंगल को बाहर निकाल लेती है। इसलिए इसको आप इतने हल्के में नहीं ले सकते हैं । ना ही मैं इसके पीछे का विज्ञान नहीं जानना चाहता हूँ। पर मैं जानता हूँ कि मेरी माँ भी जब यह मेरा लिए करती है तो मैं इससे ठीक हो जाता हूँ। ज्योतिशास्त्र का स्टूडेंट के नाते मैं कह सकता हूँ कि छोटी-छोटी चीज़े हैं पर इनके पीछे बहुत सारा ज्ञान है। .............................................

3 -Mothers, usually to ward off evil eye on children, what do they do? Which is the House for Mothers? The 4th House. And, what does a Mother do to ward off evil eye? She circles a chilly around her child & burns it! What does this mean? What is the relationship between the 4th & the 8th House? It makes an angle of 120 degrees, isn’t it? So, if the child is suffering from Fever, or if the child’s body temperature is very high, that means it’s the effect of the planet, Mangal or Mars. If there is pain in the body, then also it’s the effect of Mars. If the eyes have swollen & become red, then also it’s Mars! So the mother took a chilly, circled it around the child; this means that she took the planet, Mars into the chilly and burnt it, i.e., put it into the Fire element or the Aries zodiac sign, so that the child becomes healthy again. So, this is the logic of Mothers circling the chilly around their children & burning it to ward off the evil eye;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

महावास्तु ब्रह्मस्थान में विश्वास नहीं करता है, जिस भी सभ्यता में घर के बीच के स्थान खुलें हैं वो सभ्यता हमेशा ग़ुलाम रही है । पुराने ज़माने में दो प्रकार का वास्तु होता था, एक राजा के लिए और एक प्रजा के लिए ।प्रजा के वास्तु में ब्रह्मस्थान इसलिए ख़ाली रखने को कहा गया ताकि वो किसी भी प्रकार की संभावना का लाभ प्राप्त ना कर सके, एक भी भवन ऐसा नहीं है जिसमें घर के बीच का स्थान ख़ाली हो और जिन सभ्यताओं में यह केंद्रीय आंगन नहीं है, उन सभ्यताओं ने हमेशा शासन किया है ।

तुम्हारा घर वास्तव में तुम्हारा ही एक आवरण है,खुद का विस्तारहै। तुम ही हो तुम्हारा घर कोई अंतर नहीं वास्तव में तुम स्वयं हो तुम्हारा घर। इसलिए जब तुम उसके भीतर जाते हो तो तुम्हारा अवचेतन उसको अपना ही विस्तारित भाग होता है । जिस-जिस दिशा में जिस-जिस देवता में जो जो चीज़ें होती हैं, वैसी ही वो तुम्हारी प्रोग्रामिंग कर देता है । ब्रह्मा वास्तव में न क्रिएटर प्रतीकात्मक रूप है। ब्रह्मा के ऊपर सीधा कभी भी काम नहीं करना उससे तुम जेनेटिक डिसऑर्डर पैदा कर देते हो । थॉट प्रोसेस में कभी भी इस जगह को छूना नहीं क्योंकि यह अभिव्यक्ति का स्थान है। तुम यहाँ कुछ भी करके, कुछ भी करके तुम उस प्रोसेस को उस मेनिफेस्टेशन को ठीक ऐसे ही रोक देते हो जैसे माँ के पेट में एक बच्चा जो पनप रहा है तो वो कहाँ से फीड लेता है, कहाँ से लेता है नाभि से फीड लेता है न? क्या कोई ऐसी तकनीक बन गई है कि वो नाभि उसकी उखाड़ कर हम बाहर कोई पाइप लगा दें और उससे खाना खिला देंग तो वो बच्चा पनप जाए, एक्साक्ट्ली ब्रह्मा प्लेस ऐसा ही,कभी भी इस स्थान को छुएँ और इसको मेनिफेस्ट करना होता है आप पहले उद्देश्य को परिभाषित नहीं कर सकते। को मेनिफेस्ट करना होता है आप पहले उद्देश्य को परिभाषित नहीं कर सकते।


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